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Laava

Laava

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Description
लावा कुछ बिछड़ने के भी तरीक़े हैं खैर, जाने दो जो गया जैसे थकन से चूर पास आया था इसके गिरा सोते में मुझपर ये शजर क्यों इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में ढूँढ़ता फिरा उसको वो नगर-नगर तन्हा आज वो भी बिछड़ गया हमसे चलिए, ये क़िस्सा भी तमाम हुआ ढलकी शानों से हर यक़ीं की क़बा ज़िंदगी ले रही है अंगड़ाई पुर-सुकूँ लगती है कितनी झील के पानी पे बत पैरों की बेताबियाँ पानी के अंदर देखिए बहुत आसान है पहचान इसकी अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है जो मंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा कि हमने देर लगा दी पलटके आने में आज फिर दिल है कुछ उदास-उदास देखिए आज याद आए कौन न कोई इश्क़ है बाक़ी न कोई परचम है लोग दीवाने भला किसके सबब से हो जाएँ
Product details
Binding:
Paperback
Edition:
6
Number of Pages:
148
Publication Date:
2016-01-01
Publisher:
Rajkamal Prakashan
Languages:
Published: Hindi, Original: Hindi
ISBN10:
8126729627
Minimum Reading Age:
5
Maximum Reading Age:
80
Weight:
25 g
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